Saturday, December 24, 2016

आज जाने की ज़िद न करो

A powerful, and deep, sentiment is expressed in this song. It appears that the female lover is pleading that the lover must not leave ... but, the pleading can be between any two human beings, particularly if the intensity of the sentiment is very strong and deep: ... हाय मर जाएंगे, हम तो लुट जाएंगे ... (I'll die if you leave, I'll be devastated ...)

Lyrics are rendered with almost every word getting its full import by the manner in which it is sung.



... ♫ ♫ ♫ ♫ ...
आज जाने की ज़िद न करो
यूँही पहलू में बैठे रहो
हाय मर जाएंगे, हम तो लुट जाएंगे
ऐसी बातें किया न करो

... ♫ ♫ ♫ ♫ ...
तुम ही सोचो ज़रा, क्यों न रोकें तुम्हें
जान जाती है जब उठके जाते हो तुम
तुमको अपनी कसम, जाँ-ए-जाँ,
बात इतनी मेरी मान लो
आज जाने की ज़िद न करो

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वक़्त की क़ैद में ज़िंदगी है मगर
चंद घड़ियाँ यहीं हैं जो आज़ाद हैं
इनको खोकर मेरी, जाँ-ए-जाँ,
उम्र भर न तरसते रहो
आज जाने की ज़िद न करो

... ♫ ♫ ♫ ♫ ...
कितना मासूम रंगीन है ये समा
हुस्न और इश्क़ की आज मेराज है
कल की किसको खबर, जाँ-ए-जाँ,
रोक लो आज की रात को
आज जाने की ज़िद न करो

यूँही पहलू में बैठे रहो
हाय मर जाएंगे, हम तो लुट जाएंगे
ऐसी बातें किया न करो
आज जाने की ... 

2 comments:

K. Ramesh Babu said...
This comment has been removed by the author.
K. Ramesh Babu said...

A longer version that includes the last stanza is in https://www.youtube.com/watch?v=gh_UZuNUZR0.